बहोत गेंदबाज गेंद बायी तरफ से दायी तरफ से हवा में लहराये वेसी बॉलिंग करते है । सामान्य रूप से गेंद सीधी दिशा में जाती है पर गेंदबाज अपनी चतुराई से स्विंग करता है गेंद जब हवा में फेंकी जाती है तब उस पर घर्षण लगता है और घूमती हुई हवा को चीरती हुये आगे जाती है तब उसकी दोनों तरफ हवा का प्रेशर लगता है क्रिकेट की गेंद के बीच में सिलाई की होती है और दोनों तरफ लीसी सपाटी होती है थोड़ी पुरानी गेंद एक तरफ से असमतल भी होती है बोलर गेंद इस प्रकार पकड़ता है जहा गेंद सिलाई खड़ी रेखा में आये वैसी बॉलिंग करता है । गेंद की दोनों सपाटी लीसी हो तो गेंद सीधी दिशा में गति करता है और जब एक तरफ लीसी और दूसरे तरफ असमतल सपाटी होती है तब उस पर हवा का घर्षण लगता है फिर गेंद असमतल सपाटी तरफ लहराती है । स्विंग करते गेंदबाज इस बात का ख्याल रखते है जब नयी लीसी सपाटी वाली गेंद में सिलाई का भाग असमतल सपाटी का काम करता है गेंद दायी या बायीं तरफ स्विंग होती है और गेंद ज्यादा गति में स्विंग कम होता है इस लिए गेंदबाज कम गति पर गेंद डालता है ।
क्रिकेट में गेंद स्विंग क्यू होती है ?
बहोत गेंदबाज गेंद बायी तरफ से दायी तरफ से हवा में लहराये वेसी बॉलिंग करते है । सामान्य रूप से गेंद सीधी दिशा में जाती है पर गेंदबाज अपनी चतुराई से स्विंग करता है गेंद जब हवा में फेंकी जाती है तब उस पर घर्षण लगता है और घूमती हुई हवा को चीरती हुये आगे जाती है तब उसकी दोनों तरफ हवा का प्रेशर लगता है क्रिकेट की गेंद के बीच में सिलाई की होती है और दोनों तरफ लीसी सपाटी होती है थोड़ी पुरानी गेंद एक तरफ से असमतल भी होती है बोलर गेंद इस प्रकार पकड़ता है जहा गेंद सिलाई खड़ी रेखा में आये वैसी बॉलिंग करता है । गेंद की दोनों सपाटी लीसी हो तो गेंद सीधी दिशा में गति करता है और जब एक तरफ लीसी और दूसरे तरफ असमतल सपाटी होती है तब उस पर हवा का घर्षण लगता है फिर गेंद असमतल सपाटी तरफ लहराती है । स्विंग करते गेंदबाज इस बात का ख्याल रखते है जब नयी लीसी सपाटी वाली गेंद में सिलाई का भाग असमतल सपाटी का काम करता है गेंद दायी या बायीं तरफ स्विंग होती है और गेंद ज्यादा गति में स्विंग कम होता है इस लिए गेंदबाज कम गति पर गेंद डालता है ।

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