Holocaust इस अंग्रेजी वर्ड का मतलब प्रलय होता है इस के बारे में आपको बताने जा रहा हु , ' ' ' प्रलय ' चार प्रकार के होते है नित्य ,नैमित्तिक , प्राकृत और आत्यन्तिक जगत में उत्पन्न हुए पापियों की जो सदा मृत्यु होती रहती है उसका नाम नित्य प्रलय है एक हजार युग बीतने पर जब ब्रह्माजी की दिन समाप्त हो जाता है, उस समय जो सृष्टि का लय हो जाता है , वह ' ब्राह्म लय ' के नाम से प्रसिद्व है इसीको नैमित्तिक प्रलय भी कहते है पांचों भूतो में प्रकृतिमें लीन होना ' प्राकृत प्रलय कहलाता है तथा ज्ञान हो जाने पर जब आत्मा परमात्माके स्वरूप में स्थिर होता है उस अवस्था को नाम आत्यन्तिक प्रलय है कल्प के अंत में जब आत्यन्तिक प्रलय आता है में वर्णन करता हु जब चारों युग एक हजार बार व्यतीत हो जाते है तब सौ वर्षो तक भयकर बारिश होती है उस में भूमि के सम्पूर्ण जीव-जंतु के विनाश हो जाता है उस के बाद त्रिलोक के स्वामी भगवान विष्णु सूर्य के सात किरणों पर स्थिर हो कर पृथ्वी , पाताल और समुद्र का सारा जल पी जाते है इससे सर्वत्र जल सुख जाता है फिर भगवान की इच्छा से जल का आहार करके पुष्ट हुई वे ही सातो किरणे सात सूर्य रूप में प्रकट होती है वे सातों सूर्य समस्त तिलोकीको जलाने लगते है उस समय यह पृथ्वी कछुए के पीढ के समान हो जाती है
अग्नि पुराण के अनुसार प्रलय और उसके प्रकार :
Holocaust इस अंग्रेजी वर्ड का मतलब प्रलय होता है इस के बारे में आपको बताने जा रहा हु , ' ' ' प्रलय ' चार प्रकार के होते है नित्य ,नैमित्तिक , प्राकृत और आत्यन्तिक जगत में उत्पन्न हुए पापियों की जो सदा मृत्यु होती रहती है उसका नाम नित्य प्रलय है एक हजार युग बीतने पर जब ब्रह्माजी की दिन समाप्त हो जाता है, उस समय जो सृष्टि का लय हो जाता है , वह ' ब्राह्म लय ' के नाम से प्रसिद्व है इसीको नैमित्तिक प्रलय भी कहते है पांचों भूतो में प्रकृतिमें लीन होना ' प्राकृत प्रलय कहलाता है तथा ज्ञान हो जाने पर जब आत्मा परमात्माके स्वरूप में स्थिर होता है उस अवस्था को नाम आत्यन्तिक प्रलय है कल्प के अंत में जब आत्यन्तिक प्रलय आता है में वर्णन करता हु जब चारों युग एक हजार बार व्यतीत हो जाते है तब सौ वर्षो तक भयकर बारिश होती है उस में भूमि के सम्पूर्ण जीव-जंतु के विनाश हो जाता है उस के बाद त्रिलोक के स्वामी भगवान विष्णु सूर्य के सात किरणों पर स्थिर हो कर पृथ्वी , पाताल और समुद्र का सारा जल पी जाते है इससे सर्वत्र जल सुख जाता है फिर भगवान की इच्छा से जल का आहार करके पुष्ट हुई वे ही सातो किरणे सात सूर्य रूप में प्रकट होती है वे सातों सूर्य समस्त तिलोकीको जलाने लगते है उस समय यह पृथ्वी कछुए के पीढ के समान हो जाती है

ConversionConversion EmoticonEmoticon