गरुड़ पुराण के अनुसार स्त्री के लक्षण :
गरुड़ पुराण के में स्त्री के सुभाशुभ लक्षण बताये हे इस से हमें स्त्रीओ के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलता है , जिस कन्या के केश घुँघराले मुख मण्डलाकार यानि गोल एवं नाभि दक्षणावर्त होती है , वह कुलकी वृद्धि करनेवाली होती है । जो कन्या वक्र केशोवाली और गोल नेत्रवाली होती है , वह दु:ख भोगनेवाली माना गया है और उसका पति शीघ्र ही मर जाता है , जिस कन्या के हाथ में अंकुश , कुण्डल और चक्र हो उसे बहुत अच्छा माना गया है जिस स्त्रीके दोनों पैरकी अनामिका तथा अंगुष्ठ पृथिवीतल का स्पर्श नहीं करते है , वह शीघ्र पति का नाश करती है , तथा स्वेच्छाचार पूर्वक जीवन बिताने वाली होती है तथा मंडलाकार और कपीलवर्णकी कन्या को अशुभ कहा गया है ।
गरुड़ पुराण के अनुसार पुरुष के लक्षण:
मार्ग पे गमन करनेपर विषम रूपसे पड़नेवाले तथा विषम रूप के वाला पुरुष वंश का नाश करता है शड्कवाकार चरण हो वेसा पुरुष कुलटा स्त्री के रहता है , मत्सय के समान उदरवाले को बहोत ज्यादा धनवान होते है , चिपटाकार गले वाला निर्धन माना गया है सथूल उगली हो भी दरिद्र बनता है छोटे-छोटे कानवाला कंजूस होता है अगुष्ठ - मुलतक रेखावाला पुरुष पुत्रवान होता है तथा रक्तवर्ण छोटी दाढ़ी वाले को अच्छा नहीं माना गया है ।

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